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IPMAT Ki Taiyari Kaise Kare? शुरुआत से समझें पूरा स्टडी प्लान

Last Updated on 04 Nov 2026

PMAT Ki Taiyari Kaise Kare

आप 12वीं के बाद IIM में पढ़ना चाहते हैं, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि IPMAT की तैयारी कहाँ से शुरू करें? कौन-से विषय पढ़ें, रोज कितना समय दें और बोर्ड एग्जाम के साथ तैयारी कैसे करें?

शुरुआत में ऐसे सवाल आना सामान्य है। खासकर जब आपने अभी IPMAT के बारे में जानना शुरू किया हो।

हम आपको इस गाइड में आसान भाषा में बताएँगे कि IPMAT ki taiyari kaise karein, पढ़ाई का प्लान कैसे बनाएँ और अपनी गलतियों को सुधारकर तैयारी को बेहतर कैसे करें।

Table Of Contents

IPMAT की तैयारी शुरू करने से पहले एग्जाम समझें

पढ़ाई शुरू करने से पहले आपको यह पता होना चाहिए कि IPMAT इंदौर, IPMAT रोहतक और JIPMAT अलग-अलग एग्जाम हैं। इनके जरिए आप संबंधित संस्थानों के मैनेजमेंट प्रोग्राम की एडमिशन प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।

एग्जाम

तैयारी के मुख्य हिस्से

IPMAT इंदौर

क्वांटिटेटिव एबिलिटी और वर्बल एबिलिटी

IPMAT रोहतक

क्वांटिटेटिव एबिलिटी, लॉजिकल रीजनिंग और वर्बल एबिलिटी

JIPMAT

क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, डेटा इंटरप्रिटेशन एवं लॉजिकल रीजनिंग, वर्बल एबिलिटी एवं रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन

इंदौर के गणित वाले हिस्से में MCQ और शॉर्ट आंसर के अलग सेक्शन होते हैं। इसलिए तैयारी करते समय सिर्फ विषय नहीं, सवालों का तरीका भी समझें। अपने एग्जाम वर्ष का आधिकारिक पैटर्न और सिलेबस जरूर देखें।

अगर आप एक से ज्यादा एग्जाम देना चाहते हैं, तो पहले उनके कॉमन विषय तैयार करें। फिर अलग सेक्शन और पैटर्न के हिसाब से प्रैक्टिस जोड़ें।

IPMAT की तैयारी कैसे करें?

1. पहले अपनी तैयारी का स्तर जाँचें

कोई किताब खरीदने या लंबा टाइम टेबल बनाने से पहले यह समझें कि आपको अभी कितना आता है।

इसके लिए एक पुराना पेपर या शुरुआती स्तर का IPMAT mock test हल करें। पहली बार में कम स्कोर आए, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस टेस्ट का उद्देश्य आपकी शुरुआती स्थिति समझना है।

टेस्ट के बाद ये बातें लिखें:

  • गणित में कौन-से सवाल शुरू ही नहीं कर पाए?
  • अंग्रेजी का पैसेज समझने में कहाँ परेशानी हुई?
  • किन सवालों में जरूरत से ज्यादा समय लगा?
  • कितने जवाब आते हुए भी गलत हुए?

इससे आपको पता चलेगा कि किस विषय की तैयारी बेसिक्स से शुरू करनी है।

उदाहरण: अगर प्रतिशत और अनुपात के सवाल नहीं बन रहे, तो सीधे कठिन सवाल लगाने के बजाय पहले इन्हीं के कॉन्सेप्ट समझें।

2. सिलेबस को छोटे हिस्सों में बाँटें

पूरा IPMAT syllabus एक साथ देखने पर तैयारी मुश्किल लग सकती है। इसलिए हर विषय की छोटी सूची बनाएँ।

विषय

अपनी सूची में क्या लिखें?

गणित

पढ़ने वाले टॉपिक्स, पूरे हुए टॉपिक्स और कमजोर टॉपिक्स

अंग्रेजी

रीडिंग, शब्दों की समझ, ग्रामर और सवालों की प्रैक्टिस

रीजनिंग

आपके टारगेट एग्जाम में आने वाले टॉपिक्स और प्रैक्टिस सेट

हर टॉपिक के सामने तीन में से एक स्थिति लिख सकते हैं: शुरू नहीं किया, पढ़ लिया, प्रैक्टिस बाकी है।

किसी टॉपिक का वीडियो देख लेना उसे पूरा करना नहीं है। आपको उसके सवाल खुद भी हल करने चाहिए।

3. Quant (गणित) के बेसिक्स मजबूत करें

IPMAT की गणित की तैयारी में जल्दबाजी करना नुकसान कर सकता है। अगर बुनियादी कॉन्सेप्ट साफ नहीं हैं, तो कठिन सवालों के समाधान भी समझ नहीं आएँगे।

आप अपनी जरूरत के हिसाब से इन बुनियादी चीजों से शुरुआत कर सकते हैं:

  • भिन्न और दशमलव।
  • प्रतिशत।
  • अनुपात और समानुपात।
  • औसत।
  • बेसिक समीकरण।
  • घात और मूल।

इसके बाद अपने एग्जाम के सिलेबस के अनुसार आगे के टॉपिक्स पढ़ें।

शुरुआत में सही तरीका सीखें। गति पर उसके बाद काम करें।

गणित के सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स समझने के लिए IPMAT Quantitative Aptitude syllabus देखें।

4. अंग्रेजी को रोज की आदत बनाएँ

अंग्रेजी की तैयारी सिर्फ नियम और शब्द याद करने से पूरी नहीं होती। आपको पढ़ी हुई बात समझने की आदत भी बनानी होगी।

रोज अपनी क्षमता के अनुसार कोई छोटा अंग्रेजी आर्टिकल या पैसेज पढ़ें। फिर खुद से पूछें:

  • इसमें मुख्य बात क्या थी?
  • लेखक किस बात से सहमत या असहमत है?
  • किसी पैराग्राफ का पहले वाले पैराग्राफ से क्या संबंध है?

धीरे-धीरे पढ़ने का स्तर बढ़ाएँ। नए शब्दों के लिए सिर्फ अर्थ न लिखें। जिस वाक्य में शब्द मिला है, उसे भी लिखें। इससे आपको शब्द का इस्तेमाल समझने में मदद मिलेगी।

5. रीजनिंग और डेटा वाले सवालों की अलग प्रैक्टिस करें

अगर आप IPMAT Rohtak या JIPMAT की तैयारी कर रहे हैं, तो संबंधित रीजनिंग सेक्शन के लिए अलग समय रखें।

किसी सवाल को हल करते समय पहले जानकारी को व्यवस्थित करें। जरूरत के अनुसार छोटी टेबल या डायग्राम बनाएँ।

डेटा इंटरप्रिटेशन के सवालों में पहले यह देखें:

  • डेटा किस बारे में है?
  • संख्या किस यूनिट में दी गई है?
  • सवाल कुल संख्या पूछ रहा है या प्रतिशत?
  • क्या पूरी कैलकुलेशन जरूरी है?

सवाल जल्दी पढ़कर सीधे कैलकुलेशन शुरू करने से गलतियाँ हो सकती हैं।

अपनी IPMAT Verbal Ability Preparation को बेहतर बनाएँ।

6. सीमित स्टडी मटेरियल चुनें

बहुत सारी किताबें, PDF और वीडियो जमा कर लेने से तैयारी अपने आप बेहतर नहीं होती।

हर विषय के लिए एक मुख्य स्रोत चुनें। उसी से कॉन्सेप्ट पढ़ें और सवाल करें। किसी टॉपिक में परेशानी आए, तो मदद के लिए दूसरा स्रोत देखें।

आपके पास शुरुआत में ये चीजें होनी चाहिए:

  • अपने एग्जाम का सिलेबस और पैटर्न।
  • कॉन्सेप्ट समझने के लिए किताब या क्लास नोट्स (IPMAT notes)
  • प्रैक्टिस के सवाल।
  • पुराने प्रश्नपत्र (IPMAT previous year papers)
  • मॉक टेस्ट।

तैयारी के लिए सही किताबें चुनने हेतु best books for IPMAT preparation की सूची देखें।

नई सामग्री जोड़ने से पहले देखें कि आपने मौजूदा सामग्री कितनी पूरी की है।

7. पढ़ाई के साथ टॉपिक टेस्ट दें

पूरा सिलेबस खत्म होने तक टेस्ट का इंतजार न करें।

अगर आपने प्रतिशत पढ़ लिया है, तो उसका छोटा टेस्ट दें। इससे पता चलेगा कि आप कॉन्सेप्ट समझ पाए हैं या सिर्फ उदाहरण देखकर सवाल कर रहे थे।

टेस्ट को तीन स्तरों पर इस्तेमाल करें:

टेस्ट

कब उपयोग करें?

क्या समझ आएगा?

टॉपिक टेस्ट

एक टॉपिक पढ़ने के बाद

उस टॉपिक की समझ

सेक्शनल टेस्ट

किसी विषय के कई टॉपिक्स तैयार होने पर

समय और सवाल चुनने की क्षमता

फुल मॉक

तैयारी की शुरुआत में स्तर जाँचने और आगे नियमित अभ्यास के लिए

पूरे पेपर में प्रदर्शन

8. हर मॉक का एनालिसिस करें

मॉक देने के बाद सिर्फ स्कोर देखकर अगला मॉक देना शुरू न करें। असली सुधार तब होगा जब आप गलतियों के कारण समझेंगे।

हर मॉक के सवालों को इन हिस्सों में बाँटें:

सवाल की स्थिति

आपको क्या करना चाहिए?

सही हुआ, लेकिन बहुत समय लगा

छोटा या बेहतर तरीका समझें

कॉन्सेप्ट नहीं आता था

संबंधित टॉपिक दोबारा पढ़ें

कैलकुलेशन की गलती हुई

अपनी लिखी कैलकुलेशन जाँचें

सवाल गलत पढ़ा

छूटी हुई शर्त पहचानें

आसान था, लेकिन छोड़ दिया

सवाल चुनने की रणनीति देखें

जिस सवाल का समाधान देखा है, उसे कुछ समय बाद बिना मदद के दोबारा हल करें। तभी पता चलेगा कि आपने तरीका समझा है या नहीं।

9. रिवीजन के लिए अलग समय रखें

अगर आप रोज नए टॉपिक्स पढ़ते रहेंगे और पुराना नहीं दोहराएँगे, तो पहले पढ़ी बातें भूल सकते हैं।

रिवीजन के लिए छोटी नोटबुक रखें। इसमें लिखें:

  • जरूरी फॉर्मूले और उनकी शर्तें।
  • बार-बार होने वाली गलतियाँ।
  • ऐसे सवाल जिनसे नया तरीका सीखा।
  • अंग्रेजी के उपयोगी शब्द और वाक्य।

हफ्ते में एक तय समय पुरानी गलतियों और कमजोर टॉपिक्स के लिए रखें।

10. बोर्ड एग्जाम और इंटरव्यू को भी ध्यान में रखें

अगर आप 12वीं में हैं, तो IPMAT की तैयारी के कारण स्कूल की पढ़ाई पूरी तरह न छोड़ें। संस्थान के अनुसार बोर्ड के अंक योग्यता या चयन प्रक्रिया में मायने रख सकते हैं।

जहाँ इंटरव्यू लागू हो, उसके लिए भी धीरे-धीरे तैयारी करें। अपने बारे में बोलना, विषयों को समझकर पढ़ना और मैनेजमेंट चुनने की वजह स्पष्ट करना उपयोगी रहेगा।

इसके लिए रोज लंबा इंटरव्यू सेशन जरूरी नहीं है। शुरुआत में किसी विषय पर दो मिनट साफ तरीके से बोलने की प्रैक्टिस कर सकते हैं।

IPMAT के लिए रोज कितने घंटे पढ़ें?

इसका एक जवाब सभी के लिए सही नहीं होगा। आपको कितना समय चाहिए, यह आपके बेसिक्स, उपलब्ध महीनों और स्कूल या दूसरी जिम्मेदारियों पर निर्भर करता है।

शुरुआत के लिए नीचे दिया गया तीन घंटे का उदाहरण देख सकते हैं:

काम

समय

गणित का कॉन्सेप्ट और सवाल

75 मिनट

अंग्रेजी की पढ़ाई और सवाल

45 मिनट

रीजनिंग या दूसरे कमजोर हिस्से की प्रैक्टिस

30 मिनट

रिवीजन और गलतियों की नोटबुक

30 मिनट

अगर आप सिर्फ इंदौर की तैयारी कर रहे हैं, तो रीजनिंग वाला समय अपनी जरूरत के अनुसार गणित या अंग्रेजी को दे सकते हैं।

टेस्ट वाले दिन समय में बदलाव करें और उसके एनालिसिस के लिए भी जगह रखें। आपका लक्ष्य रोज तय घंटों तक बैठने के साथ कोई काम पूरा करना होना चाहिए।

IPMAT के अगले एग्जाम की पूरी जानकारी देखें

11वीं से IPMAT Ki Taiyari Kaise Kare?

अगर आप 11वीं में हैं, तो आपके पास बेसिक्स पर काम करने और पढ़ने की आदत बनाने का अच्छा समय है।

आप शुरुआत में:

  • स्कूल और IPMAT की पढ़ाई का संतुलन बनाएँ।
  • गणित के कमजोर कॉन्सेप्ट साफ करें।
  • रोज अंग्रेजी पढ़ें।
  • छोटे टॉपिक टेस्ट दें।
  • हफ्ते में पढ़े हुए टॉपिक्स दोहराएँ।

शुरुआत से बहुत ज्यादा मॉक देने के बजाय पहले सीखने और नियमित अभ्यास पर ध्यान दें।

11वीं के छात्रों के लिए IPMAT preparation strategy from Class 11 भी उपयोगी हो सकती है।

12वीं के साथ IPMAT की तैयारी कैसे करें?

12वीं में आपको बोर्ड और एंट्रेंस, दोनों के लिए समय निकालना होगा।

इसके लिए हर हफ्ते का प्लान बनाएँ। स्कूल के भारी दिनों में छोटा अभ्यास रखें और छुट्टी वाले दिन कठिन टॉपिक्स या टेस्ट करें।

बोर्ड एग्जाम नजदीक आने पर IPMAT का समय कम करना पड़े, तो अंग्रेजी पढ़ना और पहले से पढ़े टॉपिक्स का छोटा रिवीजन जारी रख सकते हैं। बोर्ड के बाद उपलब्ध समय के अनुसार तैयारी बढ़ाएँ।

अगर आप नए सिरे से शुरू कर रहे हैं, तो पहले अपने टारगेट एग्जाम और कमजोर हिस्सों की पहचान करें। किसी दूसरे छात्र का टाइम टेबल ज्यों का त्यों अपनाना जरूरी नहीं है।

क्या बिना कोचिंग के IPMAT की तैयारी कर सकते हैं?

हाँ, आप सेल्फ स्टडी से तैयारी कर सकते हैं। इसके लिए आपको सही सामग्री, नियमित पढ़ाई और अपनी गलतियों को समझने का तरीका चाहिए।

अगर आप कॉन्सेप्ट खुद समझ पा रहे हैं, शेड्यूल पूरा कर रहे हैं और टेस्ट के बाद सुधार कर रहे हैं, तो आपकी तैयारी आगे बढ़ रही है।

अगर बार-बार डाउट अटक रहे हैं, पढ़ाई का क्रम समझ नहीं आ रहा या आप नियमित नहीं रह पा रहे, तो शिक्षक या मेंटर की मदद ले सकते हैं।

IPMAT coaching चुनते समय देखें कि आपको क्लास के साथ डाउट सॉल्विंग, प्रैक्टिस और मॉक एनालिसिस में कितनी मदद मिलेगी।

IPMAT की तैयारी में कौन-सी गलतियाँ नहीं करनी चाहिए?

गलती

बेहतर तरीका

सिर्फ वीडियो देखते रहना

हर कॉन्सेप्ट के बाद खुद सवाल हल करें

गणित पर पूरा समय देना

अंग्रेजी और दूसरे जरूरी सेक्शन के लिए समय रखें

टेस्ट से बचना

छोटे टेस्ट से शुरुआत करें

हर मॉक के बाद नई रणनीति बनाना

कई टेस्ट में दिख रहे पैटर्न के आधार पर बदलाव करें

हल देखकर सवाल को तैयार मान लेना

उसे बाद में बिना मदद के दोबारा करें

सिर्फ घंटों की गिनती करना

पूरे हुए काम और सीखे हुए कॉन्सेप्ट देखें

बोर्ड की पढ़ाई छोड़ देना

दोनों के लिए हफ्ते का प्लान बनाएँ

IPMAT परीक्षा से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां देखें

IPMAT इंदौर आंसर की

IPMAT इंदौर में सीटों की संख्या

IPMAT इंदौर के विषय

IPMAT की फुल फॉर्म

IPMAT रोहतक के पासिंग मार्क्स

IPMAT रोहतक आंसर की

IPMAT की तैयारी से जुड़े सवाल (FAQs)

आप 11वीं से शुरुआत कर सकते हैं। अगर आप 12वीं में हैं या 12वीं पास कर चुके हैं, तो अपनी योग्यता और उपलब्ध समय देखकर प्लान बनाएँ।

हाँ, आप तैयारी शुरू कर सकते हैं। पहले यह पहचानें कि परेशानी किन कॉन्सेप्ट में है। फिर आसान सवालों से शुरू करके धीरे-धीरे स्तर बढ़ाएँ। कमजोर बेसिक्स के साथ सीधे कठिन पेपर लगाने से बचें।

रोज मॉक देना जरूरी नहीं है। संख्या आपकी तैयारी के स्तर पर निर्भर करेगी। उतने ही मॉक दें, जिनका आप ठीक से एनालिसिस और रिवीजन कर सकें।

मॉक आपकी तैयारी जाँचते हैं। जिन विषयों के कॉन्सेप्ट नहीं आते, उन्हें अलग से पढ़ना होगा। सीखना, अभ्यास और टेस्ट, तीनों जरूरी हैं।

आसान अंग्रेजी लेख पढ़ें, उनका मुख्य विचार लिखें और छोटे पैसेज के सवाल हल करें। कठिन शब्दों की लंबी सूची याद करने के बजाय शब्दों को वाक्य के साथ समझें।

आप शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन तैयारी का समय आपके एग्जाम की तारीख और मौजूदा स्तर पर निर्भर करेगा। पहले टेस्ट देकर स्थिति समझें और उसके आधार पर पढ़ाई की प्राथमिकताएँ तय करें।
Virendra Soni

Virendra Soni

Virendra heads SEO & Content at LPT. A writer at heart, he focuses on building exam-focused content that informs, guides, and supports aspirants in their preparation journey.

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